जनजाति संरक्षण व विकास पर गणेशराम नागर सरस्वती बालिका विद्या मंदिर बल्केश्वर में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

आगरा गौड़ की आवाज़ ब्यूरो अमित कुमार गणेशराम नागर सरस्वती बालिका विद्या मंदिर बल्केश्वर आगरा के सभागार में अनुराधा भाटिया जी (गणेशराम नागर की सदस्या व अखिल भारतीय सह महिला प्रमुख), डॉ पंकज भाटिया (अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम चिकित्सा संयोजक), डॉ सोनल गुप्ता (स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम प्रबंधिका ), विकास अस्थाना (सह संपर्क प्रमुख) कौशल जी (वनवासी कल्याण आश्रम कार्यकर्ता), डॉ राघवेंद्र तिवारी जी (स्वयं सेवक संघ पर्यावरण प्रमुख), श्रीमान जितेंद्र सिंह (सह कोषाध्यक्ष) विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती चारु पटेल जी के द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्य वक्ता डॉक्टर सोनम गुप्ता जी ने जनजातीय समाज के संरक्षण, विकास और उनकी पारंपरिक विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अपने संबोधन में कहा कि जनजातियाँ हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा हैं। उनकी भाषा, कला, नृत्य, संगीत और जीवन-शैली भारत की विविधता को मजबूत बनाते हैं। विद्यालय की छात्राओं ने जनजातीय गीत के माध्यम से अपनी संस्कृति को प्रस्तुत कर ,सभी को भाव -विभोर कर दिया।
कार्यक्रम में अनुराधा भाटिया जी के द्वारा बताया गया कि आधुनिक समय में जनजातियों की पहचान और संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए समाज को मिलकर प्रयास करना होगा। विशेषकर युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना होगा। विद्यालय की छात्रा खुशी गुप्ता ने अपने भाषण के माध्यम से जनजाति की विशेषताओं के बारे में बताया। प्रोजेक्टर के माध्यम से जनजाति के ऊपर एक लघु फिल्म के द्वारा उनकी कार्यशैली व क्रांतिकारी भावना को दिखाया गया। तत्पश्चात एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें छात्राओं ने बड़े ही मनोयोग से इस प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया।

निर्णायक मंडल की अनुराधा भाटिया जी द्वारा प्रथम पुरस्कार व गुप्ता 9B, द्वितीय पुरस्कार प्राची सिंह 10F, तृतीय पुरस्कार अंशिका अग्रवाल 9A व सांत्वना पुरस्कार एंजेल जायसवाल 9E, अनन्या वार्ष्णेय 9A को दिया गया।मंच का संचालन आचार्या चंद्रभागा जी के द्वारा किया गया।अंत में आचार्या रेखा अग्रवाल के द्वारा एक स्वरचित कविता पढ़ी गई और आए हुए अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए, धन्यवाद दिया। इसी प्रकार के अन्य जागरूक कार्यक्रम निरंतर सभागार में होते रहे ऐसी कामना के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।